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कमलेष कुमार
डॉ . कविता शर्मा
Keywords:
गणेष्वर संस्कृति, ताम्र पाषाण संस्कृति, पुरास्थल, सर्वेक्षण, मृदपात्र परम्परा, ताम्र उपकरण, लघु पाषाण उपकरण, धातु शोधन अयस्क आदि।
Abstract:
राजस्थान की ताम्र-पाषाणिक संस्कृतियों में गणेश्वर संस्कृति नीमकाथाना को विशिष्ट बनाती है। नीमकाथाना जिला मुख्यालय से लगभग 11 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में मालकेतु नामक पर्वत (अरावली श्रेणी की पर्वत मालाऐं) की तलहटी में एक प्राचीन गांव वर्तमान गणेश्वर 27°49' उतरी अक्षांश एवं 75°51 पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। वर्तमान में यह तीर्थ स्थान व धार्मिक दृष्टि से भी अपना महत्त्व रखता है। क्विदंतीयो में हजारों वर्ष पहले यह गणेश्वर गांव इसी पर्वत के पूर्व वाले भाग अति उच्च शिखर पर 'गढ़का' नाम से बसा था, लेकिन कालांतर में गढ़का उजड़ हो गया तत्पश्चात यह वर्तमान गणेश्वर के समीप भूदोली के रास्ते पर 'भोजपुरया' नाम से बसाया गया। किन्तु कुछ वर्षो बाद यह भी प्राकृतिक कारणो से बर्बाद हो गया कहा जाता है कि वह आधे से अधिक जमीन में धस गया तत्पश्चात श्री रायसलजी (जो बत्तीस प्रदेश के तंवर क्षत्रीय थे) ने इसे वर्तमान गणेश्वर की जगह बसाया। यहाँ गालव ऋषिजी का प्राकृतिक गर्म पानी का नाला है, इसीलिए गणेश्वर एक धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
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International Journal of Recent Research and Review
ISSN: 2277-8322
Vol. XVIII, Issue 4
December 2025
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PUBLISHED
December 2025
ISSUE
Vol. XVIII, Issue 4
SECTION
Articles
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